भिनाय के न्यायिक क्षेत्राधिकार को केकड़ी में ही रखने की मांग, बार एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन
केकड़ी- भिनाय उपखण्ड के दीवानी एवं फौजदारी प्रकरणों का क्षेत्राधिकार केकड़ी में ही यथावत रखने की मांग को लेकर बार एसोसिएशन केकड़ी ने महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन प्रेषित किया है। ज्ञापन उपखण्ड अधिकारी, केकड़ी के माध्यम से भेजा गया। ज्ञापन में बताया गया कि केकड़ी में वर्तमान में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के दो न्यायालय संचालित हैं, जिनके अंतर्गत केकड़ी, सावर, सरवाड़ एवं भिनाय थाना क्षेत्रों का संपूर्ण न्यायिक क्षेत्राधिकार आता है। केकड़ी में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के प्रथम न्यायालय की स्थापना वर्ष 1989-90 में कैंप न्यायालय के रूप में हुई थी, जिसे वर्ष 1997 के आसपास स्थायी न्यायालय का दर्जा दिया गया। इसके बाद प्रकरणों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वर्ष 2013-14 में द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय की स्थापना की गई। तब से दोनों न्यायालयों में नियमित रूप से कार्य संचालित हो रहा है।
बार एसोसिएशन के अनुसार, वर्तमान में बिजयनगर क्षेत्र में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना का प्रस्ताव राज्य सरकार एवं माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय स्तर पर विचाराधीन है। इस दौरान बिजयनगर के अधिवक्ताओं द्वारा भिनाय क्षेत्र का न्यायिक क्षेत्राधिकार प्रस्तावित बिजयनगर न्यायालय को सौंपे जाने की मांग की जा रही है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि भिनाय उपखण्ड का न्यायिक क्षेत्राधिकार पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से केकड़ी में ही रहा है। वर्तमान में भिनाय क्षेत्र के सभी दीवानी एवं फौजदारी प्रकरण केकड़ी न्यायालयों में विचाराधीन हैं तथा भिनाय क्षेत्र के अधिवक्ता भी नियमित रूप से केकड़ी में ही प्रैक्टिस करते हैं। भिनाय उपखण्ड क्षेत्र की दूरी केकड़ी से 10 किलोमीटर से प्रारंभ होकर अधिकतम 35-40 किलोमीटर तक है, जिससे आमजन को सुविधा रहती है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि भिनाय उपखण्ड वर्तमान में अजमेर जिले में आता है, जबकि बिजयनगर क्षेत्र ब्यावर जिले के अंतर्गत है। ऐसे में एक जिले के अपीलीय क्षेत्राधिकार को दूसरे जिले में स्थानांतरित करना न्यायोचित नहीं होगा। पूर्व में एडीएम न्यायालय में भी भिनाय संबंधी मामलों की सुनवाई का अधिकार केकड़ी में ही था।
बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि भिनाय उपखण्ड को बिजयनगर न्यायालय के क्षेत्राधिकार में जोड़े जाने का कोई निर्णय लिया जाता है, तो यह क्षेत्र के नागरिकों एवं अधिवक्ताओं के साथ अन्याय होगा। ऐसी स्थिति में बार एसोसिएशन केकड़ी आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होगी। बार एसोसिएशन केकड़ी के अध्यक्ष सीताराम कुमावत के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने यह ज्ञापन सौंपा।

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