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संस्कृत वैज्ञानिक अनुसंधान का आधार, संरक्षण से ही भारत बनेगा पुनः विश्वगुरु : दत्तात्रेय वज्रल्ली

केकड़ी। संस्कृत भारती चित्तौड़प्रांत के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संस्कृत भाषा प्रबोधन वर्ग का समापन समारोह नगर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हैदराबाद से पधारे संस्कृत भारती के अखिल भारतीय सह-संगठन मंत्री दत्तात्रेय वज्रल्ली रहे।


समापन समारोह को संबोधित करते हुए वज्रल्ली ने कहा कि संस्कृत को ‘मृत भाषा’ कहना सर्वथा अनुचित है, यह वास्तव में ‘अमृत भाषा’ है। उन्होंने बताया कि जर्मनी और अमेरिका जैसे विकसित राष्ट्र भी भारतीय संस्कृत ग्रंथों के आधार पर आधुनिक विज्ञान में शोध कर रहे हैं। संस्कृत की विशुद्ध व्याकरणिक संरचना और वैज्ञानिकता के कारण यह कंप्यूटर तथा अंतरिक्ष विज्ञान के लिए भी अत्यंत उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विश्वभर में एक करोड़ से अधिक लोग दैनिक जीवन में संस्कृत का प्रयोग कर रहे हैं। राजस्थान में केकड़ी, बीकानेर और अलवर में प्रबोधन वर्ग संचालित किए जा रहे हैं।

मुख्य अतिथि स्वामी हरिदास जी महाराज (नृसिंह द्वारा) ने कहा कि संस्कृत प्रत्येक भारतीय की पहचान है। उन्होंने शास्त्र और शस्त्र—दोनों के संरक्षण पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रांताध्यक्ष महेश शर्मा ने की।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

समापन अवसर पर शिविर के संभागियों—पाणिनि एवं पतंजलि गण—द्वारा प्रस्तुत संस्कृत नाटक एवं नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतिभागी विशाल एवं माधवी ने शिविर को जीवन परिवर्तनकारी अनुभव बताया।

गरिमामय उपस्थिति

कार्यक्रम का शुभारंभ भारतमाता के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर वर्ग संयोजक डॉ. हरिओमशरण शर्मा, प्रांत मंत्री डॉ. मधुसूदन शर्मा, डॉ. मीठालाल माली सहित विद्या भारती, भारत विकास परिषद व अन्य संगठनों के पदाधिकारी तथा नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में प्रांताध्यक्ष महेशचंद्र शर्मा ने सहयोगी संगठनों, भामाशाहों एवं नगरवासियों का आभार व्यक्त किया।

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