नववर्ष पर नेमिनाथ जिनालय में भक्तामर स्तोत्र का संगीतमय आयोजन
केकड़ी। अंग्रेजी कैलेंडर के नववर्ष की पूर्व संध्या पर श्री नेमिनाथ जिनालय में धर्म, भक्ति और आस्था से ओतप्रोत धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला संपन्न हुई। आचार्य श्री के सानिध्य में संपूर्ण जैन समाज द्वारा 48-48 दीपकों के साथ भक्तामर स्तोत्र पाठ का संगीतमय आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
आचार्य श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि भक्तामर स्तोत्र का नियमित श्रवण करने से समस्त व्याधियां दूर होती हैं तथा परिवार में सुख-शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने नववर्ष को धर्म, संयम और सदाचार के साथ प्रारंभ करने का संदेश दिया।
भक्तामर पाठ के मुख्य पुण्यार्जक महावीर प्रसाद, सुनील कुमार, अनिल मित्तल, संजय मित्तल परिवार (देवगांव), भागचंद-ज्ञानचंद जैन, कुमार विनय कुमार जैन मशीनरी एवं भागचंद-विनय कुमार धुंधरी परिवार रहे। पाठ के पश्चात आचार्य श्री की महाआरती संपन्न हुई, जिसका सौभाग्य ताराचंद-सुनील कुमार चांदसेन परिवार को प्राप्त हुआ। समाज के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन (ज्वैलर्स) एवं मंत्री कैलाश जैन (मावा वालों) ने कार्यक्रम की जानकारी दी।
नववर्ष के दिन प्रातःकाल भव्य जिनाभिषेक का आयोजन किया गया। श्री नेमिनाथ जिनालय में महामस्तकाभिषेक एवं शांतिधारा के साथ मंदिर में विराजित समस्त प्रतिमाओं का सामूहिक अभिषेक आचार्य श्री के सानिध्य में संपन्न हुआ। मुख्य शांतिधारा का पुण्यार्जन मनोज कुमार-विनोद कुमार, गोविंद कुमार-राजकुमार, टीकमचंद-विपिन कुमार, शांतिलाल-पारस कुमार, विमलचंद-चेतन कुमार एवं अनिल जैन ने किया।
इसके पश्चात मंगल प्रवचन में गुरुवर आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज की जन्मजयंती के शुभ अवसर पर आचार्य श्री ने भावपूर्ण शब्दों में गुरुवर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि “मुझ जैसे पत्थर को गुरुवर ने हीरा बना दिया।” उन्होंने बताया कि गुरुवर द्वारा दीक्षित राष्ट्रसंतों ने देश-विदेश में जैन धर्म की पताका फहराई है।
दोपहर में गुरुवर आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में श्री नेमिनाथ विधान का भव्य आयोजन किया गया। विधान में सोधर्म इन्द्र भागचंद-ज्ञानचंद जैन, कुमार विनय कुमार सोनू-मोनू परिवार, कुबेर इन्द्र शांतिलाल-पारस कुमार, विनोद कुमार-राकेश कुमार एवं महायज्ञ नायक इन्द्र भागचंद-विजय कुमार रहे। इस अवसर पर संघस्थ संतों, साध्वीवृंद, भट्टारक, ब्रह्मचारियों द्वारा विनयांजलि अर्पित की गई तथा गुरुवर आचार्य श्री की जीवनी पर प्रकाश डाला गया।कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी संचालन शास्त्री कपिल भैया ने किया।

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