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केकड़ी जिला बहाली की मांग को लेकर बार एसोसिएशन का धरना, पहली बरसी पर आंदोलन तेज

केकड़ी जिला बनाओ अभियान के अंतर्गत केकड़ी से जिला दर्जा हटाए जाने की पहली बरसी पर केकड़ी जिला बार एसोसिएशन के तत्वावधान में अधिवक्ताओं ने धरना-प्रदर्शन कर केकड़ी को पुनः जिला बनाए जाने की पुरजोर मांग की। माह के अंतिम रविवार को अवकाश होने के बावजूद अधिवक्ताओं ने विरोध दर्ज कराते हुए जिला बहाली की आवाज बुलंद की।


धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि एक ही राजनीतिक दल की सरकार अलग-अलग राज्यों में भिन्न मापदंड अपनाते हुए राजस्थान में गठित जिलों को दुष्परिणाम बताकर समाप्त कर रही है, जबकि हाल ही में दिल्ली में आमजन को माइक्रो-लेवल पर सुगम प्रशासनिक सुविधाएं देने के उद्देश्य से नए जिले बनाए गए हैं। इसे सरकार का दोहरा रवैया बताया गया।

अधिवक्ताओं ने कहा कि जिला निरस्त होने से विकास कार्य ठप पड़े हैं और आमजन को अपनी दैनिक प्रशासनिक जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने शीघ्र केकड़ी जिले को बहाल नहीं किया तो इसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम होंगे और आगामी चुनावों में जनता इसका मुंहतोड़ जवाब देगी। वक्ताओं ने कहा कि केकड़ी के पास जिला बनने के सभी मानक मौजूद थे, इसके बावजूद दर्जा छीनना क्षेत्र के भविष्य के साथ अन्याय है। यदि जिला बना रहता तो यहां हजारों-करोड़ों रुपये के विकास कार्य प्रारंभ हो चुके होते।

धरने में यह भी ऐलान किया गया कि जिला आंदोलन से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होने पर अधिवक्ता निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मीचंद मीणा, रविशंकर पवार, रामेश्वर प्रसाद कुमावत, आदिल कुरैशी, आदित्यभान सिंह राठौड़, रविंद्र मेवाड़ा, सुनील कुमार जैन, मुंशी राधेश्याम कुमावत, टाइपिस्ट मोनू शर्मा, प्रहलाद वर्मा, रोहिंदर सिंह चौहान सहित अनेक अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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