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नियमों की मर्यादा में ही सुखी जीवन का रहस्य: आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज

केकड़ी।नियमों की मर्यादा का उल्लंघन जीवन में दुःख का कारण बनता है। यदि माता सीता ने लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन न किया होता, तो उन्हें जीवन भर पीड़ा और वियोग नहीं सहना पड़ता। यह उद्बोधन आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने सांयकालीन आनंदयात्रा के दौरान अपने प्रवचन में दिया।


आचार्यश्री ने कहा कि समय पर सोना, समय पर उठना तथा प्रातः-सायं समय पर भोजन जैसे छोटे-छोटे नियमों का पालन करने से जीवन सुखी और संतुलित रहता है। जो व्यक्ति नियमों की लक्ष्मण रेखा पार करता है, वह कभी स्थायी सुख प्राप्त नहीं कर सकता।

नववर्ष को पश्चिमी देशों की तर्ज पर मनाने का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि सूर्य जब पूर्व दिशा में उदित होता है तो तेजस्वी रहता है, जबकि पश्चिम की ओर जाकर अस्त हो जाता है। इसी प्रकार हमें पाश्चात्य संस्कृति में डूबने के बजाय नववर्ष को पूर्वी संस्कृति, धर्म और कर्म के साथ मनाकर अपने जीवन को प्रकाशमान बनाना चाहिए।

समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन एवं मंत्री कैलाश जैन (मावा वाले) ने बताया कि आनंदयात्रा के पश्चात आचार्यश्री के सान्निध्य में प्रश्नमंच का आयोजन किया गया तथा भव्य महाआरती संपन्न हुई। प्रातःकाल जिनाभिषेक, नित्यनियम पूजा एवं शांतिधारा का आयोजन भी किया गया।

चित्र अनावरण एवं धार्मिक अनुष्ठान

इस अवसर पर आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन पदम चंद सेठी परिवार द्वारा किया गया। आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य कैलाश चंद, प्रकाश चंद एवं पीयूष कुमार मावा वालों को प्राप्त हुआ।

मंगल प्रवचन में वैराग्य का संदेश

मंगल प्रवचन में आचार्यश्री ने कहा—

“राजा राणा छत्रपति, हाथी के असवार,

मरना सबको एक दिन, अपनी-अपनी बार।”

उन्होंने भगवान ऋषभदेव के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि नीलांजना के नृत्य के दौरान मृत्यु को देखकर उन्हें वैराग्य उत्पन्न हुआ और उन्होंने मिथ्यात्व का त्याग कर मोक्ष मार्ग अपनाया।

आचार्यश्री ने कहा कि मिथ्यात्व के कारण व्यक्ति जन्म-जरा-मृत्यु के चक्र में फंसा रहता है। जीवन का कल्याण करने के लिए सम्यक्त्व की औषधि ग्रहण करनी होगी। अपरिग्रह पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जो वस्तुएं न वर्तमान में उपयोगी हैं और न भविष्य में होंगी, उनका त्याग करने से पुण्य का बंध होता है।इस अवसर पर स्थानीय विधायक शत्रुघ्न गौतम ने आचार्यश्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

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